पश्चिमी चंपारण जिला मे पर्व त्योहार के समय घर लौट रहें प्रवासियों को टीबी बीमारी के प्रति किया जा रहा जागरूक






बेतिया, 26 अक्टुबर। अपने गांव घर से बाहर रह कर काम करने वाले प्रवासीयों का दीपावली और छठ  पर्व के अवसर पर घर आने का सिलसिला शुरू हो गया है।गाँव लौटे प्रवासियों को अब टीबी बीमारी के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।पश्चिमी चंपारण जिले में केएचपीटी और बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी जागरूकता अभियान के तहत अब गाँव मे भी पंचायत के जनप्रनिधि,जीविका, आशा कार्यकर्ता,आंगनबाड़ी सेविका,टीबी चैंपियन आदि  के सहयोग से प्रवासियों को टीबी बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।अभियान के तहत बुधवार को मझौलिया प्रखंड के नौतन खुर्द के सिरकहिया मुशहर टोली और रामनगर बनकट धांगड़ टोली  में प्रवासियों की बैठक में टीबी बीमारी के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी।इस दौरान केएचपीटी के सामुदायिक समन्यवक डॉ घनश्याम ने प्रवासियों को बताया कि दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें ये टीबी के लक्षण हैं।उन्होंने बताया कि सभी सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है।।डॉ घनश्याम ने बताया कि टीबी साबित हो जाने पर टीबी मरीज को सरकार के द्वारा निःशुल्क दवा के साथ साथ हर माह पांच सौ रुपये की राशि पोषण सहायत योजना के तहत पौष्टिक भोजन के लिए दी जाती है।वही वार्ड सदस्य रघुनाथ माँझी  ने  कहा जो भी प्रवासी लोग है अगर उनको टीबी संबंधित कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत अपनी जांच निश्चित रूप से करा लें।रघुनाथ  ने कहा कि सामुदायिक जागरूकता से ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं।कार्यक्रम के दौरान लक्षण वालें लोगों को सरकारी अस्पताल में जांच के लिए रेफर भी किया गया।मौके पर मुन्ना मांझी,प्रभुनाथ मांझी,अकली देवी,सुनरपति देवी,वीरा यादव सहित दर्जनों प्रवासी उपस्थित रहें।



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