सांप्रदायिकता की मक्कड़ जाल से देश को निकालना होगा

 



 बेतिया,20 अकटूबर। बिहार राज्य किसान सभा का  सिवान जिला का  37 वा  जिला  सम्मेलन का. हरिवंश शाही नगर सिवान में हुआ ।

             सम्मेलन का उदघाटन करते हुए बिहार राज्य किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि सिवान जिला का 37 वा सम्मेलन एक गंभीर परिस्थिति में हो  रहा है ।आज अपने देश की गद्दी पर सांप्रदायिक शक्तियों का कब्जा है । यह लगातार देश में नफरत की बीज बोने का काम कर रही है । ताकि हिंदू और मुसलमान के बीच तनाव बढ़े और बहुसंख्यक हिंदुओं का भावनाओं का लाभ वोट के रूप में ले सके । यहीं कारण है कि केंद्र सरकार अपनी  प्राथमिक जिम्मेदारी, संवैधानिक जिम्मेदारी का पालन नहीं कर रही है । 

         बल्कि लगातार संविधान में छेड़छाड़ किया जा रहा है । देश की जनता को प्राप्त सभी जनवादी अधिकारों पर हमले किए जा रहे हैं ।श्रम कानूनों में लगातार कटौती कर चार श्रम संहीता बनाया गया है ।

         किसानों को खेती के लिए मिलने वाली सुविधाएं लगातार छीनी जा रही है । मोदी सरकार ने 2020 में किसान विरोधी तीन काले कानून लाए थे । जिसके विरुद्ध किसानों का 11 महीने तक लगातार दिल्ली के सभी बॉर्डर और देश भर में आंदोलन चला ।आंदोलन के भय से भयभीत होकर मोदी सरकार ने किसान विरोधी तीनों काले कानूनों को वापस ले लिया था।

            लेकिन उन्होंने वादा किया था कि एमएसपी को कानूनी दर्जा देंगे , 750 सहित किसानों के परिवार को मुआवजा देंगे , देशभर में किसान पर किए गए 48 हजार मुकदमे वापस ले लेंगे , 2020 बिजली बिल वापस लेंगे  तथा लखीमपुर खीरी के 5 किसानों के हत्या के साजिशकर्ता गृह  राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को अविलंब बर्खास्त कर हत्या का मुकदमा चलाकर जेल देने , जैसे सवालों के लिए कमेटी का गठन कर उसका निष्पादन करने का वादा किया था । लेकिन एक कमिटी भी बनाई जिसमें किसान विरोधी चेहरों को शामिल कर मात्र 3 किसान प्रतिनिधियों को रखने के निर्णय का संयुक्त किसान मोर्चा विरोध करते हुए उस कमिटी में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया । 

      आज किसानों के सामने भारी संकट खड़ा है । खेती लगातार घाटे की बनती जा रही है । देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समझ है कि देश के कारपोरेट जगत के हाथों में खेती को भी दे दिया जाए और इसी उद्देश्य से सरकार काम भी कर रही है ।आपको पता है की पिछले दिनों रेल, भेल, सेल, बीएसएनएल, जीवन बीमा सहित सभी सरकारी उपकरणों को मोदी सरकार ने बेच दिया है । सड़क भी बेंच दी गई है । यही कारण है कि आप सड़क से जाते हैं , तो टोल टैक्स देना पड़ता है।  इसलिए आज की इस गंभीर परिस्थिति में खेती को बचाना हम किसानों के लिए एक चुनौती बन गया है। 

         सिवान जिला का 37 वा किसान सम्मेलन को किसानों को एकजुट कर एक बड़ा संघर्ष खड़ा करने का जिम्मेदारी लेना है । 

        इस साल वर्षा की कमी होने के चलते धान के फसल का भारी नुकसान हुआ है । लेकिन सरकार द्वारा किसानों को फसल हर्जाना नहीं दिया गया । सिवान जिले के अधिकांश अंचलों में सुखाड़ होने से भारी तबाही हुई है । लेकिन सरकार के द्वारा उन्हें भी किसी प्रकार का राहत नहीं दिया गया है। 

        साथियों संयुक्त किसान मोर्चा और बिहार राज्य किसान सभा ने साफ-साफ कहा है कि हम किसान अपना हक मांगते हैं । हम किसी से भीख नहीं मांगते। हमारे पैसे से सरकारें चलती है । हम ही अनाज पैदा कर लोगों को खिलाते हैं और हमारी ही स्थिति यह सरकार दयनीय बनाती जा रही है । बड़े पैमाने पर किसान आत्महत्या कर रहे हैं । इसलिए हमें  इस 37 वें सिवान जिला किसान सम्मेलन में शपथ लेना है कि आने वाले दिनों में बिहार राज्य  किसान सभा या संयुक्त किसान मोर्चा के फैसलों को सिवान जिले में पूर्ण रुप से लागू करेंगे । साथ ही हमें आज यह भी शपथ लेना है कि हर किसानों को किसान सभा में और किसान सभा को हर किसान के घर में ले जाना है ।

            सम्मेलन में पिछले साल के कामों का प्रतिवेदन जिला मंत्री अर्जुन यादव ने पेश किया । जिसमें संगठन की कमियों को स्वीकारते हुए । Un कमियों पर काबू पा लेने का विश्वास दिलाया ।

         प्रतिनिधि साथियों ने सचिव के प्रतिवेदन पर अपने महत्वपूर्ण विचारों को देकर संपुष्ट किया । बहस में का. फुल महमद अंसारी , श्री राम सिंह , डा. दयानन्द सिंह , परमा चौधरी , डा. लालजी नारायण , बिपिन बिहारी सिंह , ललन शाही आदि साथियों ने भाग लिया ।

          सम्मेलन ने 13 सदस्यीय जिला किसान कौंसिल का चुनाव किया । जिसके अध्यक्ष का. श्री भगवान चौबे ,  उपाध्यक्ष योगेन्द्र सिंह ,  सचिव का. अर्जुन यादव , संयुक्त सचिव डा. लालजी नारायण और कोषाध्यक्ष परमा चौधरी सर्व सम्मति से निर्वाचित हुए । स्वतंत्रता सेनानी का. मुंशी सिंह विशेष आमंत्रित चुने गए ।

        राज्य सम्मेलन में भाग लेने के लिए साथी श्री भगवान चौबे , योगेंद्र सिंह तथा डा. लालजी चौबे चुने गए ।

          समापन भाषण वरिष्ठ किसान नेता , स्वतंत्रता सेनानी का. मुंशी सिंह ने किया । उन्होंने सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सिवान जिले में किसान सभा को मजबूत बनाने पर बल दिया ।

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