बड़ा खुलासा :- बिहार के बेतिया के पास मझौलिया मे सुन्नी वक्फ बोर्ड की सैकड़ों एकड़ की भूमि भू-माफियाओं और सफेदपोशों के कब्जा में है, प्रशासन से आजाद कराने की गुहार।




                                                            ( राजन कुमार की रिपोर्ट )

 बेतिया,15 मई।  पश्चिम चंपारण मे बिहार इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्तियों और जमीनों पर लगातार सफेदपोशों की नजरें लगी हुई है। जिसके परिणामस्वरूप भू माफियाओं की मिलीभगत से अब अवैध रूप से जमीन को कब्जा कर खरीद बिक्री का खेल लगभग तीन दशक से बेधड़क जारी है। यह कहीं और नहीं बल्कि बोर्ड के अंतर्गत पश्चिम चम्पारण के बेतिया मझौलिया थाना 237, तौजी नम्बर 661,खेवट 1 जो कि बेतिया राज की खाता 2 एवं अन्य की जमीन है, का है। जिसके अंतर्गत लगभग 550 एकड़ की जमीन बिहार इस्टेट वक्फ बोर्ड के अधीन है। जिसपर अब वक्फ बोर्ड का नियंत्रण दिन प्रतिदिन लगभग समाप्ति के कगार पर है और जिस तरह से राजनीतिक दल, धार्मिक संस्थाओं, सफेदपोशों, भू-माफियाओं ने सबको दौलतों से भरपूर खुश कर बेशकीमती जमीनों को बेचने का खेल शुरू कर सबके जुबान पर ताला और नजरों पर पर्दा लगा रखा है। जिसका परिणाम है कि वक्फ बोर्ड की जमीन जानते हुए भी अनजान बनकर वक्फ की विरासत लूटता देख रहे हैं। जहाँ एक तरफ फर्जी तरीकों से जमीन बिक्री की जा रही है तो दूसरी तरफ सफेदपोश भू-माफियाओं ने अपना आलीशान मकान, निजी नर्सिंग होम, स्कूल भी बनवाकर अपना कब्जा करना शुरू कर रखा है।


      बिहार इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्तियों व जमीनों की वर्तमान में मुतवल्ली (संरक्षिका) नसरीन खातुन ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को अवैध व फर्जी तरीकों से खरीदने बेचने को लेकर बिहार इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड, पटना, जिलाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, पुलिस अधीक्षक, बेतिया, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी बेतिया सभी को आवेदन देकर वक्फ की जमीन को सुरक्षित व संरक्षित करने का आवेदन दिया है। जिसमें अवैध कब्जा को हटाने, फर्जी तरीकों से जमीन का निबंधन करने व कराने, गलत जमाबंदी करने एवं गलत खाता खेसरा के द्वारा जमीन को बेचे जाने की जानकारी देते हुए तत्काल कार्यवाही करने का मांग किया गया है। जिसमें स्थानीय भू-माफियाओं के साथ सफेदपोश नेता व चर्चित पत्रकारों पर गंभीर आरोप लगाया गया है। आवेदन देने के पश्चात मुतवल्ली नसरीन खातुन को इस फर्जीवाड़ा में शामिल तथाकथित चर्चित नामों ने गाली गलौज, जान मारने की धमकी और रंगदारी तक मांगना शुरू कर दिया है। जिसको लेकर भी पीड़ित मुतवल्ली स्थानीय मझौलिया थाना से लेकर बेतिया पुलिस अधीक्षक तक का दौड़ लगाकर थक गई हैं। पूरे प्रकरण में स्थानीय पत्रकारों की संलिप्तता मझौलिया थाना को कार्यवाही से रोक रखा है।


      वहीं इस प्रकरण में बिहार इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड की उदासीनता ही उसकी संदिग्ध संलिप्तता को उजागर कर रहा है। जिसका परिणाम है कि खेती की 550 एकड़ अब बेशकीमती होकर स्थाई/अस्थाई अतिक्रमण व अवैध कब्जा का दिन प्रतिदिन बलि चढ़ता जा रहा है। स्थानीय माफियाओं की पकड़ इतनी मजबूत है कि अब वक्फ भी अपनी जमीन होने का दावा नहीं कर पा रहा है। अब वो स्वयं वक्फ की कुछ भागों मस्जिद, कब्रिस्तान और ईदगाह की भूमि के अलावे अन्य जमीनों को अपना जमीन कहने से ही पीछे हो गया है। जिससे भू-माफियाओं, सफेदपोशों और नेताओं के लम्बी पकड़ को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता है। वहीं पूर्व से लेकर वर्तमान तक में अंचल कार्यालय, मझौलिया की भी संदिग्ध भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता, जिनके द्वारा सैकड़ों लोगों को जमाबंदी ऐसे जमीनों की दी गई जो कि मालिक गैरमजरूआ जमीन है, जिसे बेचने का अधिकार किसी को नहीं है।


      बेतिया राज की खाता 2 एवं अन्य की जमीन जिसका तौजी नम्बर 661, खेवट 1, थाना 237 की 550 एकड़ जमीन बेतिया राज के महाराजा जुगुल किशोर और महारानी जानकी कुंवर के द्वारा शेख खुदाबक्श को बख्शिस स्वरूप दिया था। जिसके अंतर्गत मस्जिद, दरगाह व अन्य धार्मिक स्थलों के साथ खेती की जमीन थी, जिसके आमदनी से राजस्व प्राप्ति और देखरेख की जाती थी। इस बख्शिस के तहत बख्शिस पाने वाले के अलल औलाद (पीढ़ी दर पीढ़ी) ही मुतवल्ली होते हैं। शेख खुदाबक्श के बाद उनकी औलाद कासीम अली उर्फ जान अली और उसके बाद उनकी औलाद मीर अंजान और उसके बाद उनकी औलाद शेख नबीजान उत्तराधिकारी के रूप में मुतवल्ली (संरक्षक) हुए। ब्रिटीश शासन काल में शेख नबीजान के नाम से खतियान बना। वहीं आजादी के बाद सन् 1954 में जमींदारी प्रथा समाप्त का कानून बना और देश में लागू हुआ। जिसके पश्चात 1956 में उन्मूलन कर अंचलाधिकारी की पदस्थापना कर सारी संपत्ति व जमीनों को तौजी नंबर 661,खेवट 1 को बिहार इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड के रजिस्ट्रेशन वक्फ 747, मझौलिया में शामिल किया गया। जिसमें 16 आना तौजी दर्ज करने की बात भी लिखी गई थी। जो कि पूर्ण रूप से बेलगान जमीन है। हालांकि सूत्रों ने दर्ज जमीनों में हेरा फेरी की आशंकाएं भी जताई है।


    बेतिया राज के महाराजा के समय से ही इन जमीनों से प्राप्त आय को कर के रूप में राजस्व में जमा कराया जाता था और उसके एवज में मुतवल्ली को खाना खुराकी की राशि दी जाती थी। इसी कारण से देखरेख और सुरक्षा में तैनात सिपाहियों को भी हुंडा, बटइया के तहत जमीन दी जाती थी और जरूरतमंदों को भी हुंडा बटइया दी जाती थी ताकि वे अपना भरण-पोषण और राजस्व कर भी दे सकें। परन्तु इन जमीनों को किसी को बेचने का अधिकार नहीं दिया गया, यहाँ तक कि मुतवल्ली को भी जमीन बेचने का अधिकार नहीं दिया गया। जो कि यह सुनिश्चित तरीकों से चलता रहा था। शेख नबीजान के बाद उनकी औलाद हकीम शमसुल होदा मुतवल्ली हुए और उन्हें सन् 1979 तक सरकार के द्वारा भरण-पोषण की राशि प्राप्त होती रही। हकीम शमसुल होदा को चार लड़की हुई, जिसके कारण उनके बाद बड़ी बेटी आरफा खातुन मुतवल्ली (संरक्षिका) बनी। जिन्होंने अपनी अस्वस्थता और निजी कारणों से अपनी छोटी बहन नसरीन खातुन को मुतवल्ली का पावर सन् 2000 में सुपुर्द किया और तब से मझौलिया स्थित खाता 2 एवं अन्य की तौजी नम्बर 661, खेवट 1, थाना 237 की वक्फ 747 की संपत्तियों और जमीनों की मुतवल्ली के रूप में देखरेख कर रही हैं।


     समय के साथ लालच और कपट ने हुंडा बटाइदारों को कब्जा धारी बना दिया और चंद महत्वाकांक्षी लोगों के प्रभाव में आकर जमीनों की खरीद बिक्री का खेल शुरू किया गया। जिसकी चर्चाओं का बाजार मीडिया और अन्य माध्यमों से होना शुरू हुआ तो बिहार इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड में पैसा और पैरवी के बल पर 11 सदस्यीय कमेटी बनवाई गई, जिसमें मुतवल्ली को ही शामिल नहीं किया गया। अपने खास गुटों के लोगों को अपने साथ रखकर बनाई गई कमेटी का हवाला देकर बिना भय के और जोर शोर से कब्जा किए लोगों के द्वारा जमीन खरीद बिक्री कराई जाने लगी। जबकि कमिटी का कार्य ईदगाह में बनी 19 दुकानों से किराया प्राप्त कर मस्जिद, दरगाह, ईदगाह, कब्रिस्तान आदि की देख रेख व साफ सफाई करना और उसी का विकास करना है। हालांकि मुतवल्ली नसरीन खातुन के द्वारा इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड को सन् 2022 तक का कर जमा कराया गया है और उनका कहना है कि वक्फ इस्टेट नम्बर 2309 ईदगाह, वक्फ इस्टेट नम्बर 747 का ही एक भाग है। 


      ऐसे में आम अह्वाम में यह सवाल उठ रहा है कि बेलगान मालिक गैरमजरूआ जमीन जिसे अलल औलाद (पीढ़ी दर पीढ़ी) के साथ वक्फ बोर्ड को दी गई उसका नाम और जमीन कैसे कोई हटाकर अपना गलत मंशा का स्वार्थ व लोभ पूरा कर सकता है। मुतवल्ली नसरीन खातुन बताती है कि जिला अभिलेखागार में संपत्ति/जमीन के विवरण का खाता फट और नष्ट हो गया है, जिससे तौजी 661, थाना 237,खेसरा 480 - 7404, खाता 2 एवं अन्य का कोई विवरण ही उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण नकल मांगने पर जवाब में यह दिया गया था। इन सबसे यह मामला और जिला अभिलेखागार का रख रखाव दोनों ही संदेहास्पद है। 


      मुतवल्ली नसरीन खातुन के द्वारा अपना हक और वक्फ की संपत्ति को सुरक्षित संरक्षित करने के लिए बिहार इस्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड को जो आवेदन दिया था उसमें बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के द्वारा 1 फरवरी 2023 को जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी, वक्फ, बेतिया को वक्फ रजिस्ट्रेशन 747 का स्थलीय जांच करने व वक्फ बोर्ड की जमीनों को अवैध बिक्रय को लेकर रिपोर्ट मांगी गई। वहीं दूसरी तरफ पश्चिम चम्पारण के जिलाधिकारी के जनता दरबार में भी इसी अवैध व फर्जी वक्फ की जमीन बिक्री को लेकर आवेदन दिया गया था, जिसमें 16 फरवरी 2023 को अंचलाधिकारी मझौलिया को स्थलीय जांच और अन्य आवश्यक कार्यवाही का निर्देश दिया गया था। 


     उक्त जांच के निर्देश के आलोक में अंचलाधिकारी , मझौलिया की जांच रिपोर्ट कई मायनों में संदेहास्पद है। वो उस रिपोर्ट में भू माफियाओं और सफेदपोशों के सभी दस्तावेजों का सूक्ष्मता पूर्वक कलमबद्ध करते हैं पर स्थलीय जांच करने की जहमत नहीं उठाया और ना ही तौजी 661, खाता 2 एवं अन्य, थाना 237, खेवट 1 जो कि वक्फ रजिस्ट्रेशन 747 के अंतर्गत आता है उसकी पूरी जमीन कितनी थी और वर्तमान में कितनी है इसका उल्लेख स्पष्ट रूप से नहीं कर रहे हैं। अपनी जांच रिपोर्ट में खाता 2 एवं अन्य की जमीन बिक्री करने की बात लिख रहे हैं परन्तु क्या उस जमीन को किसी के द्वारा बेचने का अधिकार पूर्व में या वर्तमान में किसी को था या है उसका उल्लेख भी नहीं कर रहे हैं। जिस जमीन को बेचा खरीदा नहीं जा सकता उसे कैसे फर्जी तरीकों से बेचा खरीदा गया यह वक्फ बोर्ड और प्रशासन दोनों के ऊपर तारांकित प्रश्नों को जन्म देता है। यदि स्थलीय परीक्षण किया गया तो जमीनों के निबंधन कागजातों पर खाता खेसरा और चौहदी का हेरा फेरी कैसे नजर नहीं आई? मस्जिद और कब्रिस्तान जो कि कोई खरीद बिक्री नहीं कर सकता और अतिक्रमण नहीं कर सकता उसको ही संरक्षित करने को लेकर जिला निबंधन पदाधिकारी को पत्र निर्गत कर निबंधन रोक लगाने को लेकर अपनी स्थलीय जांच का प्रमाण देने की भरपूर कोशिश की है। अंचलाधिकारी की जांच रिपोर्ट किस तरह से सफेदपोशों के प्रभाव में है वो एक एक बिन्दुओं को पढ़ने के साथ ही स्पष्ट रूप से स्व प्रमाणित होता दिखेगा।

      550 एकड़ की सुन्नी वक्फ बोर्ड की बेशकीमती जमीन पर जिस तरह से माफियाओं का शिकंजा पकड़ता जा रहा है वैसे में एक अबला, अकेली, निस्सहाय और निर्धन महिला की पकड़ ढीली पड़ जा रही है। वर्तमान अर्थ के युग में बिना अर्थ के साथ कोई भला क्यों खड़ा हो मुतवल्ली नसरीन खातुन की सच्चाई बताने के लिए कानून व कागजों की कमियों को समझने वाले भले ही इसका बेपनाह लाभ उठा लें पर मुतवल्ली नसरीन खातुन के हिम्मत को तोड़ नहीं पा रहें हैं। जिससे उनके दिलों में भय बना रहता है और शायद इसलिए ही उनको धमकी देकर चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है। यह रिपोर्ट सरकार, वक्फ बोर्ड सहित जनता को आगाह करने हेतु सूत्र के आधार पर तैयार किया गया है, बाकी अगले भाग मे......। 

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