बेतिया, 21 दिसंबर। बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ के महासचिव प्रभुराज नारायण राव ने बिहार सरकार द्वारा नये पेराई सत्र 2021-22 के लिए गन्ना मूल्य में मात्र 13 से 20 रु प्रति क्विंटल की बृद्धि पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ईख उत्पादकों के साथ धोखा बताया है । श्री राव ने कहा कि बिहार कृषि आधारित राज्य है । कृषि आधारित चीनी मिलों के अलावे दूसरा कोई उद्योग नहीं है । उसके बाद भी नीतीश सरकार गन्ने की लागत भी नहीं देना चाहती । गन्ने की खेती में निरंतर बढ़ते लागत को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा दी गई लाभकारी मूल्य (आर ए पी) के अलावे बिहार सरकार द्वारा लाभकारी मूल्य (एस ए पी) के अंतर्गत देना होगा । पंजाब सरकार सहित देश के कई राज्यों ने SAP द्वारा गन्ने की दरों में बढ़ोतरी की है।
श्री राव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य जहां कृषि ही एक मात्र साधन है । जहां के किसानों को बाढ़ तथा सुखाड़ का दंश एक साथ झेलना पड़ता है । उस बिहार के किसानों को पहले भी एसएपी मिला है । इसलिए आपको भी गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य SAP देना होगा ।
अन्यथा स्वामीनाथन आयोग के अनुशंसाओं के आधार पर लागत पर का डेढ़ गुणा दाम तथा आय दूगुनी करने जैसी लफ्फाजी को किसान समझने लगे हैं । जब देश के किसान केंद्र सरकार के किसान विरोधी कानून को प्रधानमंत्री द्वारा स्वयं वापस लेने को मजबूर कर सकता है । तो बिहार सरकार को भी उससे सबक लेकर लाभकारी मूल्य एस ए पी द्वारा 5 सौ रुपए प्रति क्विंटल गन्ना का मूल्य निर्धारित करे ।

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