Bihar/Motihari: चंपारण महान विचारों की धरती है, बौद्ध, जैन सहित विभिन्न सामाजिक विचारधाराओं की उत्पत्ति इसी बिहार की धरती से हुई - उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

 


एमजीसीयू में तृतीय दीक्षांत समारोह मोतिहारी में स्वर्ण पदकों से सम्मानित हुए नव मेधावी छात्र, राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री समेत कई गणमान्य अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति।


Meri Pehchan/ Report By अमानुल हक़ 

मोतिहारी (बिहार) महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के द्वारा राजा बाजार स्थित महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में तृतीय दीक्षांत समारोह का आयोजन शनिवार को किया गया। इस दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन थे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्यसभा के उपसभापति  हरिवंश, बिहार के राज्य के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हुस्नैन, कोयला एवं खान मंत्रालय के राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे तथा पूर्वी चंपारण के सांसद  राधामोहन सिंह की गरिमामयी उपस्थिति थी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. महेश शर्मा ने किया तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। दीक्षांत समारोह की शुरुआत शैक्षणिक शोभा यात्रा के साथ सशस्त्र सीमा बल की धुन पर हुई। मां सरस्वती की प्रतिमा व बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात द्वीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

   स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार की धरती ज्ञान की परंपरा से समृद्ध रही है, जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय इस समृद्ध परंपरा का अनुसरण कर रहा है और नई शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह अपनाकर वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अस्थायी परिसर में संचालित होने के बावजूद विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय की पुस्तकालय पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है और यहां के कई प्रोफेसर विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं। 

   अंत में उन्होंने मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।

  स्वागत उद्बोधन के पश्चात विश्वविद्यालय के कुलानुशासक द्वारा उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों की सूची जारी की गई। तत्पश्चात उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के द्वारा 9 विद्यार्थियों को उपाधि दी गई। इसमें अदिति प्रग्या, मुस्कान कुमारी, बलिराम कुमार, आदित्य प्रसाद, रचित यशस्वी, सचिन कुमार, श्रुति कुमारी, अनानंक कुमार तथा चंदन कुमार को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि चंपारण महान विचारों की धरती है। उन्होंने कहा कि बौद्ध, जैन सहित विभिन्न सामाजिक विचारधाराओं की उत्पत्ति इसी बिहार की धरती से हुई है। मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा की उपाधि भी इसी चंपारण की धरती पर सत्य और ज्ञान की अनुभूति के कारण मिली।

उन्होंने कहा कि बिहार एक कर्मभूमि है, जहां विचार क्रिया में परिवर्तित होते हैं। युवाओं को नवाचार और “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का विकास जमीनी स्तर पर मजबूत हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति की सराहना की और कहा कि देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। साथ ही उन्होंने कहा कि विकसित भारत अब केवल सपना नहीं, बल्कि एक साकार होने वाली वास्तविकता है। उन्होंने युवाओं को बताया कि निरंतर सीखना और अनुकूलन ही प्रगति की कुंजी है तथा महिलाओं की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हुस्नैन ने कहा कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति 2020 का प्रभावी ढंग से पालन कर रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ राष्ट्रहित और मानवता के कल्याण पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आज के छात्र जिज्ञासु मन के साथ आलोचनात्मक सोच विकसित कर रहे हैं और रचनात्मक प्रश्न पूछने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने युवाओं को नैतिक मूल्यों के साथ समाज सेवा की भावना अपनाने का संदेश दिया।

   बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि चंपारण आंदोलनों और ज्ञान की भूमि है, जिसने मोहनदास को महात्मा गांधी बनाया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्जीवन हुआ है और अब विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की दिशा में भी कार्य होना चाहिए।

  विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थि भारत सरकार के कोयला एवं खान मंत्रालय के राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय की गरिमा को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर ज्ञान का केंद्र बनता जा रहा है और नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों का समग्र विकास हो रहा है। 

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि बिहार ऐतिहासिक रूप से ज्ञान और परंपरा की भूमि रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को तीन प्रकार के ऋण - मातृ ऋण, पितृ ऋण और राष्ट्र ऋण की याद दिलाते हुए कहा कि इनका निर्वहन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि चंपारण सदैव महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलता आया है और सत्य ही शाश्वत है। 

   विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार के शिक्षा मंत्री  सुनील कुमार ने कहा कि आज उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ही भविष्य में राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आज के युवा बड़े सपने देख रहे हैं और उन्हें साकार भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन निरंतर सीखने की प्रक्रिया है और विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि एक अच्छे नागरिक बनने पर भी ध्यान देना चाहिए। 

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्वी चंपारण के सांसद  राधामोहन सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की स्थिर स्थिति के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। 

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत व राष्टगान के साथ संपन्न किया गया।

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