Susta (Indo Nepal): सुस्ता बचाओ सम्मेलन में नेपाली नेताओं ने भारतीय सुरक्षा कर्मियों के विरुद्ध भरी हुंकार

नेपाल सरकार के ढुलमुल रवैया के कारण सुस्ता के नागरिक और जमीन दोनों पड़े हैं बंधक

Meri Pehchan / Report By विवेक कुमार सिंह 

वाल्मीकिनगर (बेतिया)। विवादित सुस्ता(नेपाल) में शनिवार को नेपाल‌ लुंबिनी प्रदेश के नेताओं द्वारा विवादित सुस्ता को पूर्णतः नेपाल का हिस्सा बनाने एवं सुस्ता में रहने वाले नागरिकों के नेपाली नागरिकता देने को लेकर "सुस्ता बचाओ सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें नेपाल सरकार लुंबिनी प्रदेश के प्रमुख कृष्ण बहादुर घर्ती, लुंबिनी प्रदेश के सभा प्रमुख तुलाराम घर्ती,उपा सभा प्रमुख मेनका खांड़, लुंबिनी प्रदेश के वन मंत्री देवकरण कलवार, पूर्व भूमि सुधार महानिदेशक सीमा विद, बुद्धि नारायण से श्रेष्ठ एवं पूर्व दस्यु सरगना मुन्ना खान शामिल हुए। सुस्ता बचाओ सम्मेलन का नेतृत्व सुस्ता बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष आदम खान कर रहे थे। इस अवसर पर आदम खान ने भारतीय सीमा से सटे भूमि को जबरन कब्जा करने का आरोप लगाते हुए भारतीय सुरक्षा कर्मियों पर निशाना साधा। अपने संबोधन में आदम खान ने कहा कि भारतीय सुरक्षा कर्मियों द्वारा नेपाली नागरिकों एवं सुरक्षा कर्मियों पर वर्षों पहले गोलीबारी की गई थी। जिसमें हमारे कई नागरिक मारे गए थे। दस्यु सरगना मुन्ना खान का जिक्र करते हुए आदम खान ने बताया कि उनके कई एकड़ जमीन को भारत और बिहार सरकार द्वारा जबरन कब्जा कर लिया गया है। जो पूर्णतः नेपाल का है। नेपाल सरकार के ढुलमुल रवैया के कारण सुस्ता में रहने वाले नागरिकों को आज तक न्याय नहीं मिल सका है। भारतीय सुरक्षाकर्मी हमारे सीमाओं तक अपनी चौकी बनाए हुए हैं। सुस्ता को पूर्णतः नेपाल का हिस्सा बनाने के लिए हम नेपाल सरकार से लगातार मांग करते आ रहे हैं। इसके लिए अब आंदोलन करेंगे।इस अवसर पर सुस्ता बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष आदम खां ने कहा 40,980 हेक्टेयर भूभाग में से 7,500 हज़ार हेक्टेयर भूभाग सुस्तावासियों के पास है, 19,600 हेक्टेयर भूभाग को लेकर विवाद है और बाकी भूभाग का अतिक्रमण बिहार के लोगों ने किया है।सुस्ता के लोगों की मांग सिर्फ इतनी है कि नेपाल के भूभाग नेपाली लोगों को दे दिए जाएं।


   आदम खान ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय सुरक्षा कर्मियों का व्यवहार नेपाली नागरिकों के प्रति सौतेलापन होने के कारण ही नेपाल से सीधा जुड़ाव के लिए गंडक नदी पर झूला पुल का निर्माण कराया गया। हमारे नागरिक भारतीय बाजारों में जाते थे। उनको भारतीय सुरक्षा कर्मी जांच के नाम पर  परेशान करते थे। झूला पुल का निर्माण होने से सुस्ता के नागरिक अब सीधे नेपाल के बाजारों से जुड़ गए हैं। अब उन्हें भारतीय सीमा से होकर जाने की जरूरत नहीं है।

 लुंबिनी प्रदेश प्रमुख कृष्ण बहादुर थापा ने कहा कि सुगौली संधि के बाद से ही सुस्ता को नेपाल का हिस्सा मानने के लिए भारत सरकार से चर्चा की जा रही है। लेकिन भारत सरकार के अड़ियल रवैया के कारण सुस्ता के नागरिक आज भी कई योजनाओं से वंचित हैं। सुस्ता में रहने वाले कई नागरिकों को आज तक नागरिकता नहीं प्राप्त हुई, उन्हें लाल पूर्जा नहीं दिया गया है। 

   सुस्ता बचाओ सम्मेलन  में पहुंचे लुंबिनी प्रदेश के वन मंत्री व पांच नंबर प्रदेश के विधायक देवकरण कलवार ने अपनी सरकार से साफ तौर पर प्रश्न पूछा की नेपाल सरकार बताए कि सुस्ता नेपाल का हिस्सा है या नहीं? हमें हर हाल में सुस्ता को बचाना है। सुस्ता के नागरिक और धनहिया रेता तक का जमीन, नेपाल का है। जिस जमीन को भारत अपना समझ रहा है वह हमारा है और हम इसके लिए आंदोलन करते रहेंगे। नेपाल के कई एकड़ जमीन पर भारत का कब्जा है इसके लिए हमारा केंद्रीय नेतृत्व भारत सरकार से यथाशीघ्र बातचीत कर समाधान निकाले। ताकि हमारे सुस्ता के नागरिकों को उनका हक प्राप्त हो सके। वहीं बुद्धि नारायण श्रेष्ठ (सेवा निवृत्त )नेपाल के सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक

ने अपने संबोधन में कहा कि यह दुःख की बात है कि सुस्ता के मामले में नेपाल-भारत तकनीकी या राजनयिक कर्मियों ने इस मसले के ऊपर चर्चा ही नहीं की है। नेपाल की सरकार चाहती तो सुस्ता का सर्वांगीण विकास‌ हो सकता था। सुस्ता पर नेपाल का आधिपत्य कायम कराने में मुन्ना खां की अहम भूमिका अहम है।                          

    15 सितंबर 1982 को  वाल्मीकिनगर के तत्कालीन दारोगा एवं दो आरक्षियों की गोली मारकर हत्या मुन्ना खान कर दी थी। उसके बाद नेपाल के कुछ राजनेताओं के शह पर वह अपना वर्चस्व सुस्ता पर कायम रखने लगा। फिर धीरे धीरे सुस्ता पर नेपाल का कब्जा दिलाना शुरू कर दिया। सुस्ता पूरी तरह विवादित होने के बाद भी नेपाल के कब्जे में है।

    सुस्ता विवाद भारत और नेपाल के बीच का एक सीमा विवाद है, जिसकी जड़ें 1816 की सुगौली संधि में हैं, जिसने गंडक नदी को दोनों देशों की सीमा घोषित किया था। नदी के बदलते मार्ग के कारण, सुस्ता नामक विवाद उपजा। यह विवाद 1965 से जारी है और नदी के कटाव से भारतीय भूमि पर नेपाल के अतिक्रमण का मुद्दा भी उठा है।


  1816 की सुगौली संधि के तहत गंडक नदी को भारत और नेपाल के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा माना गया था। नदी का दाहिना किनारा नेपाल और बायां किनारा भारत के नियंत्रण में था। 

  समय के साथ गंडक नदी ने अपना मार्ग बदल लिया, जिससे सुस्ता क्षेत्र नदी के भारतीय (बाएं) किनारे पर आ गया। 

संधि के अनुसार, सुस्ता कभी नेपाल के दाहिने किनारे पर था, इसलिए नेपाल का कहना है कि यह उसका ही हिस्सा है। 


चूंकि वर्तमान में सुस्ता नदी के बाएं किनारे पर स्थित है, जो भारत के नियंत्रण में है, भारत इस क्षेत्र को अपना मानता है। 


    नेपाल द्वारा इस पर लगातार दावा किया जाना और भारत की सीमा के भीतर अतिक्रमण की गतिविधियां इस विवाद को और बढ़ा रही हैं।

यह विवाद भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच कई बैठकों का विषय रहा है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। 


     नेपाल इस क्षेत्र में निर्माण कार्य और अतिक्रमण जैसी गतिविधियां कर रहा है, जो भारत की चिंता का कारण है। 

यह मुद्दा नेपाल में भारत के विरोध में जनभावनाओं को भड़काने का भी ज़रिया बनता है।

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