मेरा धन है स्वाधीन कलम - कविवर गोपाल सिंह




चम्पारण, 11 अगस्त।  गीतों के राजकुमार कविवर गोपाल सिंह 'नेपाली' की जयंती के अवसर पर गुरुवार को नगर के कविवर नेपाली पथ, पुराना बस स्टैंड स्थित नेपाली स्मारक की स्थानीय साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों द्वारा साफ-सफाई की गई एवं नेपाली जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने नेपाली जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने उद्गार व्यक्त किये। 'अफसोस नहीं इसका हमको, जीवन में हम कुछ कर न सकें। झोलियाँ किसी की भर न सकें, संताप किसी का हर न सकें। अपने प्रति सच्चा रहने का जीवन भर हमने काम किया। देखा-देखी हम जी न सके, देखा-देखी हम मर न सके। 'मेरा धन है स्वाधीन कलम', 'तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो', 'हिन्दी है भारत की बोली', 'मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे' आदि कालजयी रचनाओं को याद कर, दुहरा कर कवि-साहित्यकारों ने नेपाली को श्रद्धांजलि दी। मौके पर डॉ. परमेश्वर भक्त, प्रो. कमरुज्जमां कमर, सुरेश गुप्त, अरुण गोपाल, अखिलेश्वर मिश्र, ललन पाण्डेय लहरी, आभास झा 'युवा', जयकिशोर जय, जगत भूषण राज, डाॅ. दिवाकर राय, डाॅ. राजेश कुमार चंदेल, डाॅ. ज्ञानेश्वर गुंजन, डॉ. जगमोहन कुमार, ज्योति प्रकाश, पाण्डेय धर्मेन्द्र शर्मा, समाजसेवी सह साहित्यप्रेमी बिहारी लाल प्रसाद उर्फ लाल दरोगा महतो, अनिल कुमार, राम कुमार, पवन राज, महेन्द्र चौधरी आदि उपस्थित रहे।

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