किसानों मजदूरों के सफल महापड़ाव का संकेत 2024 के आम चुनाव में मोदी हराओ अभियान और तेज होगा।

 

                                                


                                                           o प्रभुराज नारायण राव o

   पटना, 28 नवंबर।  संयुक्त किसान मोर्चा तथा ट्रेड यूनियनों द्वारा 26 से 28 नवंबर तक देश के हर राज्यों के राज भवन पर महापड़ाव डालने के अभियान के अंतिम दिन आज सफलता पूर्वक तथा गर्मजोशी के साथ संपन्न हो गया। आज अंतिम दिन पटना के महापड़ाव में किसानों मजदूरों की भारी उपस्थिति रही।

           पटना राजभवन महापड़ाव के 10 सदस्यीय अध्यक्ष मंडल में बिहार राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष प्रभुराज नारायण राव, सीटू के दीपक भट्टाचार्य ,एटक के गजनफर नवाब , ए आई के  एम एस के महासचिव नंदकिशोर सिंह ,किसान महासभा के राजेंद्र पटेल आदि शामिल थे।

          महापड़ाव को अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव तथा बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव विनोद कुमार, किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह,किसान सभा बिहार के अध्यक्ष रवींद्र कुमार आदि ने संबोधित किया।

        किसान मजदूरों का तीन दिवसीय महापड़ाव यह साबित कर दिया है कि संघ और भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय सरकार तथा  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो समझ थी कि यह किसान आंदोलन दिल्ली के इर्द गिर्द ही है। यह आंदोलन पंजाब हरियाणा तथा पश्चिमी यूपी के किसानों द्वारा ही किया जा रहा है। इस आंदोलन का देश के किसानों पर कोई असर नहीं है , यह आंदोलन सरकार के ऊपर किसी तरह की दबाव बनाने की ताकत नहीं रखती । 

         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 महीने तक दिल्ली बॉर्डर पर चली ऐतिहासिक किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए किसान विरोधी तीनों तीनों काले कानून को वापस लिया था और उन्होंने किसान नेताओं से आग्रह किया था कि हड़ताल को समाप्त किया जाए और शीघ्र ही हम किसान नेताओं के साथ बैठकर उनके मांगों को पूरा करेंगे ।

          लेकिन ऐसा नहीं होना था । यह किसान नेताओं की पहले से ही शंका थी ।यही कारण था कि किसान नेताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चल रहा आंदोलन समाप्त नहीं किया । बल्कि उसे स्थगित करके किसान अपने-अपने घर चले गए। प्रधानमंत्री कितने अवसरवादी, विश्वासघाती और झूठे हैं यह बात सर्व विदित है और वही हुआ जब प्रधानमंत्री ने किसानों के मांगों को पूरा करने के संदर्भ में कोई पहल नहीं किया।तो संयुक्त किसान मोर्चा अपने आंदोलन को और तेज  करने का निर्णय लिया । इस बीच 26 जनवरी 2023 को देशभर में ट्रैक्टर मार्च निकाला गया था और अलग-अलग राज्यों में कई कार्यक्रम किए जा रहे थे । संयुक्त किसान मोर्चा ने 9 अगस्त मोदी हटाओ आंदोलन , 14 अगस्त रतजगा आंदोलन तथा 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर राष्ट्रीय झण्डा फहराने और संविधान तथा लोकतंत्र की रक्षा करने का संकल्प लिया था।

           लेकिन 24 अगस्त 2023 को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में संयुक्त किसान मोर्चा के साथ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ । तो वह एक ऐतिहासिक छाप छोड़ गया ।क्योंकि पहली बार देश के किसान और देश के मजदूर राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ एक मंच पर नजर आए । 24 अगस्त राष्ट्रीय सम्मेलन में कुछ आगामी कार्यक्रम भी घोषित किया गया ।जिन कार्यक्रमों को देश के कोने-कोने में लागू करने का काम शुरू हो गया। जब 3 नवंबर को लखीमपुर खीरी के चार किसान तथा एक पत्रकार की हत्या के विरुद्ध 72 घंटे का सत्याग्रह किया गया । जिसमें किसानों के हत्यारा गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर उन पर हत्या का मुकदमा चला कर गिरफ्तार करने की मांग की गई और इस तरीके से आंदोलन और आगे बढ़ता गया । 

           26 से 28 नवंबर तक देश के हर  राज्यों के राजभवनों पर महापड़ाव डाला गया और इस महापड़ाव में किसानो और मजदूरों की जो संयुक्त भागीदारी देखी गई। वह आने वाले दिनों में नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए गंभीर संकट को दर्शाता है । किसानो और मजदूरों की एकजुटता और मजबूती दिखला रहा है और इनका जो लक्ष्य है वह 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को परास्त कर नरेंद्र मोदी को गद्दी से उतारना है ।


           किसान और मजदूरों की समझ है कि मोदी सरकार देश के कॉर्पोरेट जगत के इशारे  पर काम कर रही है । यह सही मायने में देश के कॉर्पोरेट तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद की पिट्ठू सरकार के रूप में काम कर रही है। नरेंद्र मोदी की सरकार देश की अंतरराष्ट्रीय नीतियों में बदलाव कर अमरीकी साम्राज्यवाद तथा नाटो के देशों से गहरा संबंध स्थापित करने का काम किया है। यह मानसा विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर देश को एक बार फिर गुलाम बनाने का है।संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेताओं तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियन के नेताओं को भी बखूबी पता है । मोदी सरकार इसराइल जैसी जुल्मी सरकार को समर्थन दे रही है ।जबकि दशकों से हमारा देश फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के साथ रहा है और फिलिस्तीन की आजादी का समर्थन करता है।इसलिए अपनी समस्याओं के समाधान की बात छोड़कर देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित भारत की संविधान की रक्षा के लिए, देश में लोकतांत्रिक मूल्यों तथा धर्मनिरपेक्षता की हिफाजत के लिए जरूरी है कि देश में नफरत की राजनीति करने वाली, धार्मिक उन्माद फैलाने वाली, हमारी एकता को खंड-खंड करने वाली संघ भाजपा और मोदी सरकार को गद्दी से उतारना ही अपना मुख्य लक्ष्य बनाया है ।उसी आधार पर पूरे देश की जान गण के साथ आंदोलन को आगे बढ़ा रही है।

          अब यह आंदोलन राजनीतिक दलों द्वारा बनाई गई एकता की प्रतीक इंडिया गठबंधन को भरपूर सहयोग और अपनी भागीदारी देने का मन बना लिया है ।इसलिए निश्चय ही कहा जा सकता है कि भारत का संयुक्त किसान मोर्चा तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियन की संयुक्त कार्रवाई अब देश के छात्र ,नौजवान , महिला ,बुद्धिजीवी समुदाय को एकजुट करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा और नरेंद्र मोदी की सरकार को गद्दी से उतारेगा तभी देश और देश की जनता की रक्षा की जा सकती है।

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